औरैया जनपद (उत्तर प्रदेश) में सिंचाई सुविधा का विकास

Authors

  • ज्योति पाल आर.एस.एम.(पी.जी.) कॉलेज, धामपुर, बिजनौर, भारत Author

Keywords:

सिंचित क्षेत्र, वर्षा, क्षेत्रफल, रोजगार

Abstract


भारत की भौगालिक परिस्थिति तथा वर्षा की मात्रा इस प्रकार की है कि सफलतापूर्वक कृषि कार्य चलाने के लिए सिंचाई के कृत्रिम साधनों को जुटाना आवश्यक है। देश के प्रत्येक भाग मे ं अधिक कृषि उत्पादकता के लिए सिंचाई अत्यन्त आवश्यक है। सिंचाई की सहायता से भूमि को सुधारकर खेती के काम में लाया जा सकता है, उसका आर्थिक दृष्टि से उपयोग किया जा सकता है तथा उन क्षेत्रफलो ं में फसल उगाना सम्भव हो जाता है जहॉ ं पानी के अभाव में इसका उत्पादन लगभग असम्भव होता है। अनुसंधानकर्ता ने सिंचाई के तकनीकी व संरचनात्मक पहलू का अध्ययन किया है जो कि सिंचाई का प्रभ् ाव जानने के लिए आवश्यक भी है। शोध से स्पष्ट है वर्ष 1997-98 में जनपद में 79.71 प्रतिशत सिंचित क्षेत्र के सापेक्ष वर्ष 2006-07 में यह 85.44 प्रतिशत हो गया। पिछले दस वर्षों के दौरान सिंचित क्षेत्र 111862 हेक्टेयर से बढ़कर 122813 हेक्टेयर हो गया। वर्ष 2006-07 के दौरान जनपद के विभिन्न विकासखण्डों में सिंचित क्षेत्र सर्वाधिक एरवाकटरा विकासखण्ड (99.64 प्रतिशत), इसके बाद विधूना (99.22 प्रतिशत), अछल्दा (97.11 प्रतिशत), सहर (92.25 प्रतिशत), भाग्यनगर (82.10 प्रतिशत), अजीतमल (80.46 प्रतिशत) व औरैया (55.99 प्रतिशत) का स्थ् ान आता है। जनपद मे ं पिछले 10 वर्षों मे ं एरवाकटरा विकासखण्ड मे ं सर्वाधिक 10.26 प्रतिशत सिंचित क्षेत्र में वृद्धि हुई है तथ् ा सबसे कम सहर विकासखण्ड में 1.29 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। सिंचाई की सुविधाओ ं में परिवर्तन की वजह से औरैया जनपद में नगदी फसलों की खेती का क्षेत्रफल बढ़ा है जो रोजगार में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहायक हुई है तथा लोगों के जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है।

Published

2010-06-16